मनचाहा प्यार, प्यार में धोखा खाएं, विदेष यात्रा में रूकावट, दुष्मन-सौतन से छुटकारा, किसी ने कुछ किया कराया हो, वषीकरण स्पेषलिस्ट इत्यादि न जाने कितने ही ऐसे भ्रामक विज्ञापन आजकल देखने को मिलते हैं। बकायदा ऐसे विज्ञापनों व ऐसे बाबाओं का व्यापार दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा हैं, जगह-जगह जैसे ट्रेनों, बसों, पब्लिक प्लेसों, स्टेषनों आदि पर ये विज्ञापन बहुत ही आसानी से देखने को मिल जाते हैं। यहां तक की ऐसे बाबा बकायदा काम पूरा होने का वादा भी करते हैं, जैसे 101 घंटों, 50 घंटे, 20 घंटे या 11 घंटे इत्यादि में आपकी समस्याआंे का समाधान, यहां तक की कुछ तो ये भी वादा करते हैं कि आपको उनके पास आने की जरूरत ही नहीं, सिर्फ घर बैठे फोन पर समाधान पाए मात्र कुछ घंटों में।
यहां ये सोचने का विषय हैं कि आजकल की पीढ़ी जिसे सब कुछ बहुत ही आसानी से चाहिए, सारे ऐषों-आराम, अच्छा व्यापार, मनचाहा प्यार इत्यादि ऐसे भ्रामक विज्ञापन क्या ऐसे युवाओं के दिल में घर नहीं करते होंगे? न जानें कितनी ही कहानियां या समाचार हम आजकल देखते हैं कि फला बाबा के चक्कर में आकर किसी ने अपनी बेटी की बलि दे दी। फला बाबा के चक्कर मंे आकर बेटा चाहने की चाह में किसी ने अपनी बीवी की बलि दी या बेटे की चाह रखने वाली महिला से फला बाबा ने संबंध बनाएं इत्यादि न जाने कितने ही ऐसे समाचार सुनने को मिलते हैं और ऐसे ढ़ोगी बाबा अपना पेषा ऐसे खुले में चला रहे हैं।
क्या ये माना जाएं कि ये हमारे प्रषासन की भूल हैं जो ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल लगाने में हमारा प्रषासन सक्षम नहीं या ये माना जाए कि हमारा समाज आज भी ऐसे भ्रामक विज्ञापनों या ऐसे बाबाओं की षरण में जाकर अपना काम जल्द से जल्द कराना चाहता हैं और ठगी का षिकार बहुत ही आसानी से हो जाते हैं? वषीकरण स्पेषलिस्ट तो इन विज्ञापनों पर इतने बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता हैं जैसे ये चुटकियों में किसी को अपने वष में कर न जाने उससे या जो इन बाबाओं की षरण में आते हैं उनका काम कितनी ही आसानी से कर देंगे। मैं कभी-कभी ये सोचना हूं कि क्या सच में ऐसी कोई चीज होती हैं जिससे इंसान वष में हो जाता है।
मैं इस बात से मना नहीं करता कि पहले जमानों में ऐसी चीजें, टोना-टोटका इत्यादि नहीं होता था, पर पहले जमाने में और आज के जमाने में जमीन-आसमान जितना फर्क हैं। पहले के मुकाबले आज की पीढ़ी ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं, वो अपना भला-बुरा पहचानती है। अगर घर बैठे ही किसी को वष में करना इतना आसान होता तो मैं ये सोचता हूं कि ये बाबा लोग क्यों 100-500 यो 1000 रुपयांे के पीछे इतने विज्ञापन पर अपना खर्चा करते हैं, क्यों नहीं ये बाबा लोग बड़े-बड़े उद्योगपतियों, नेताओं, धन्ना-सेठों को वष में कर या मिस युनिवर्स, मिस इंडिया सरिखी लड़की को वष में कर उनसे अपना काम या मकसद क्यों नहीं निकलवाते। इन्हें तो बहुत ही आसानी से फिर पैसा, सुंदर कन्या इत्यादि मिल सकता हैं तो क्यों ये किसी दूसरे के लिए 500-1000 रुपये में किसी और को वषीकरण कर उसका प्यार न टूटने इत्यादि जैसी बातें करते हैं।
क्या सरकार, प्रषासन को इस और नहीं देखना चाहिए कि ये विज्ञापन आमजन को कहां लेकर जा रहे हैं, क्या इन विज्ञापनों के चक्कर में लोगों से ठगी नहीं हो रही? आखिर क्यों प्रषासन इन विज्ञापनों पर नकेल कसने में सक्षम नहीं है। ऐसे बहुत से सवाल हैं जो हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि ऐसे बाबाओं के चक्कर में आकर कब तक लोग ठगी का षिकार होते रहेंगे, कब तक ऐसे बाबा बेटे की चाह में किसी महिला को अपना षिकार बनाते रहेंगे या इत्यादि ऐसे बहुत से समाचारों में आए दिन ऐसे बाबाओं के किस्से हमें कब तक सुनने को मिलेंगे। जरूरत हैं ऐसा कानून बनाने की या अगर ऐसा कोई कानून है जिससे इन भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल कस सके उसे और मजबूत ढंग से पेष करने की जिससे इस तरह की ठगी रोकी जा सके।
यहां ये सोचने का विषय हैं कि आजकल की पीढ़ी जिसे सब कुछ बहुत ही आसानी से चाहिए, सारे ऐषों-आराम, अच्छा व्यापार, मनचाहा प्यार इत्यादि ऐसे भ्रामक विज्ञापन क्या ऐसे युवाओं के दिल में घर नहीं करते होंगे? न जानें कितनी ही कहानियां या समाचार हम आजकल देखते हैं कि फला बाबा के चक्कर में आकर किसी ने अपनी बेटी की बलि दे दी। फला बाबा के चक्कर मंे आकर बेटा चाहने की चाह में किसी ने अपनी बीवी की बलि दी या बेटे की चाह रखने वाली महिला से फला बाबा ने संबंध बनाएं इत्यादि न जाने कितने ही ऐसे समाचार सुनने को मिलते हैं और ऐसे ढ़ोगी बाबा अपना पेषा ऐसे खुले में चला रहे हैं।
क्या ये माना जाएं कि ये हमारे प्रषासन की भूल हैं जो ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल लगाने में हमारा प्रषासन सक्षम नहीं या ये माना जाए कि हमारा समाज आज भी ऐसे भ्रामक विज्ञापनों या ऐसे बाबाओं की षरण में जाकर अपना काम जल्द से जल्द कराना चाहता हैं और ठगी का षिकार बहुत ही आसानी से हो जाते हैं? वषीकरण स्पेषलिस्ट तो इन विज्ञापनों पर इतने बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता हैं जैसे ये चुटकियों में किसी को अपने वष में कर न जाने उससे या जो इन बाबाओं की षरण में आते हैं उनका काम कितनी ही आसानी से कर देंगे। मैं कभी-कभी ये सोचना हूं कि क्या सच में ऐसी कोई चीज होती हैं जिससे इंसान वष में हो जाता है।
मैं इस बात से मना नहीं करता कि पहले जमानों में ऐसी चीजें, टोना-टोटका इत्यादि नहीं होता था, पर पहले जमाने में और आज के जमाने में जमीन-आसमान जितना फर्क हैं। पहले के मुकाबले आज की पीढ़ी ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं, वो अपना भला-बुरा पहचानती है। अगर घर बैठे ही किसी को वष में करना इतना आसान होता तो मैं ये सोचता हूं कि ये बाबा लोग क्यों 100-500 यो 1000 रुपयांे के पीछे इतने विज्ञापन पर अपना खर्चा करते हैं, क्यों नहीं ये बाबा लोग बड़े-बड़े उद्योगपतियों, नेताओं, धन्ना-सेठों को वष में कर या मिस युनिवर्स, मिस इंडिया सरिखी लड़की को वष में कर उनसे अपना काम या मकसद क्यों नहीं निकलवाते। इन्हें तो बहुत ही आसानी से फिर पैसा, सुंदर कन्या इत्यादि मिल सकता हैं तो क्यों ये किसी दूसरे के लिए 500-1000 रुपये में किसी और को वषीकरण कर उसका प्यार न टूटने इत्यादि जैसी बातें करते हैं।
क्या सरकार, प्रषासन को इस और नहीं देखना चाहिए कि ये विज्ञापन आमजन को कहां लेकर जा रहे हैं, क्या इन विज्ञापनों के चक्कर में लोगों से ठगी नहीं हो रही? आखिर क्यों प्रषासन इन विज्ञापनों पर नकेल कसने में सक्षम नहीं है। ऐसे बहुत से सवाल हैं जो हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि ऐसे बाबाओं के चक्कर में आकर कब तक लोग ठगी का षिकार होते रहेंगे, कब तक ऐसे बाबा बेटे की चाह में किसी महिला को अपना षिकार बनाते रहेंगे या इत्यादि ऐसे बहुत से समाचारों में आए दिन ऐसे बाबाओं के किस्से हमें कब तक सुनने को मिलेंगे। जरूरत हैं ऐसा कानून बनाने की या अगर ऐसा कोई कानून है जिससे इन भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल कस सके उसे और मजबूत ढंग से पेष करने की जिससे इस तरह की ठगी रोकी जा सके।
